Wednesday, July 8, 2009

रेल बजट में हुई बिहार की घोर उपेक्षा के बाद तत्काल रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद यादव का लोकसभा सत्र के दौरान उबलना लाजिमी था। रेल मंत्री सुश्री ममता बनर्जी ने तो एक तरह से तो बिहार को रेलवे की परियोजनाओं से वंचित ही कर दिया। अगर ऐसी स्थिति में लालू नही बोलते तो कौन बोलता। लालू ने अपने उपर लाये जाने वाले श्वेत पत्र को भी एक चैलेन्ज के रूप में स्वीकार कर अपनी विरोधिओं का मुंह बंद करने की कोशिश कर दी।
ममता से भी कुछ कहते न बना। वो भी सिर्फ़ लालू की बातों को संसद में चुपचाप सुनती रहीं। लालू अपने पुराने अंदाज़ में बस बोलते रहे। लालू ने अपने धुर राजनैतिक विरोधी नीतिश कुमार पर भी भड़ास निकाली। उन्होंने कहा की नीतिश दूर से बैठ कर कहते हैं की लालू के बाद जो दूसरा रेलमंत्री आएगा वह अपना सर नोचेगा तो क्या ममता जी यहाँ अपना सर नोच रही हैं।
एक हद तक लालू का कहना भी सही है। लालू के ही अनुसार उन्होंने सोलह हज़ार करोड़ रुपये का अतिरिक्त कोष जुटाकर रेलवे को दुधारू गाये बन दिया. इसपर हमला किया जाना लालू को बर्दास्त नही हुआ और उन्होंने इसे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया

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